Description
IGNOU MHD-4 Solved Assignment 2025-26
सत्रीय कार्य (2025-2026)
एन.एच.डी.-04
नाटक एवं अन्य गद्य विधाएँ
पाठ्यक्रम कोड एम.एच.डी. 04/2025-2026
सत्रीय कार्य कोड एम.एच.डी.04/टी.एम.ए/2025-26
अंक : 100
खंड-1
1. निम्नलिखित अवतरणों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए। 4१10 5 40
(क). युद्ध क्या गान है? रूद्र का शुंगीनादू, भैरवी का तांडव नृत्य और शस्त्रों का वाद्य मिलकर एक भैरव-संगीत की सृष्टि होती है। जीवन के अंतिम दृश्य को जानते हुए, अपनी आंखों से देखना, जीवन-रहस्य के चरम सौंदर्य की नग्न और भयानक वास्तविकता का अनुभव-केवल सच्चे वीर-हृदय को होता है, ध्वंसमयी महामाया प्रकृति का वह निरंतर संगीत है। उसे सुनने के लिए हृदय में साहस और बल एकत्र करो। अत्याचार के श्मशान में ही मंगल का-शिव का सत्य सुंदर संगीत का समारंभ होता है।
(ख). मैं दो बड़े पहियों के बीच लगा हुआ
एक छोटा निरर्थक शोभा-चक्र हूँ
जो बड़े पहियों के साथ घूमता है
पर रथ को आगे नहीं बढ़ाता
और न धरती ही छू पाता है!
और जिसके जीवन का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है
कि वह धुरी से उतर भी नहीं सकता!
(ग). धर्म, नीति, मर्यादा, यह सब हैं केवल आडबम्बर मात्र,
मैंने यह बार-बार देखा था।
निर्णय के क्षण में विवेक और मर्यादा
व्यर्थ सिद्ध होते आये हैं सदा
हम सब के मन में कहीं एक अंध गहवर है।
बर्बर पशु, अंधा पशु वास वहीं करता है,
स्वामी जी हमारे विवेक का,
नैतिकता, मर्यादा, अनासक्ति, कृष्णार्पण
यह सब है अंधी प्रवृत्तियों की पोशाकें
जिनमें कटे कपड़ों की आँखें सिली रहती हैं
मुझको इस झूठे आडम्बर से नफरत थी
इसलिए स्वेच्छा से मैंने इन आँखों पर पट्टी चढ़ा रखी थी।
(घ). साँच कहैँ ते पनही खावें।
झूठे बहु विधि पदबी पावैं।
छलियन के एका के आगे।
लाख कहौ एकहु नहिं लागे।।
भीतर होइ मलिन की कारो।
चाहिए बाहर रंग चटकारो।।
धर्म अधर्म एक दरसाई।
राजा करे सो न्याव सदाई |।
भीतर स्वाहा बाहर सादे।
राज करहि अगले अरू प्यादे।।
अंधाधुंध मच्यौ सब देसा।
मानहुँ राजा रहत विदेसा।।
गो द्विज श्रुति आदर नहिं होई।
मानहुँ नृपति विधर्मी कोई।।
2. भारतेंदु ने ‘अंधेर नगरी’ के माध्यम से तत्कालीन राज व्यवस्था के प्रति किस तरह का दृष्टिकोण व्यक्त किया है ? 10
3. ‘स्कंदगुप्त’ चरित्र प्रधान नाटक है। इस कथन के संदर्भ में स्कंदगुप्त की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 10
4. हिंदी नाटक परंपरा में ‘आधे-अधूरे’ का स्थान निर्धारित कीजिए। 10
5. ललित निबंध की दृष्टि से कुटज की विशेषताओं क विवेचन कीजिए। 10
6. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए। 4)5ल्₹ 20
(क) ‘लोभ और प्रीति’ का प्रतिपाद्य
(ख) ‘अंधायुग’ : मिथकीय चेतना
(ग) ‘ठुकरी बाम’ की चारित्रिक विशेषता
(घ) कलम का सिपाही : शिल्पगत वैशिष्ट्य
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